Monday, May 31, 2010

4 my dearest sister...........ayushi.



पनपते हैं फूल शबनम में जिस क़दर,
खिल जाए ऐसे मुस्कान ज़िन्दगी की आपके लबों पर,
जगमगाहट है लक्ष्य जिसका,
रब करे बन जाएँ आप वो नगर,
जलवा हो ऐसा शबाब में आपके,
मंजिल खुद चलके आये आपकी डगर,
है यही शुभकामनाएं मेरी
आपके जन्मदिवस पर।





sharies 4 wedding anniversary.......


* दिल में प्यार ना हो,
तो ये हुस्न अधुरा लगता है,
संग मितवा ना हो,
तो ये जीवन गुमनाम लगता है,
धरती पर अगर आप जैसा संगम ना हो,
तो ये संसार अधूरा लगता है,
आपके होने से,
मेरा जीवन पूरा सा लगता है।

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*दो दिल एक जान जब हो जाएँ,
हमसफ़र की ख़ुशी
जान से बढकर जब हो जाए,
एक ऐसे अटूट बंधन में दोनों जब बंध जाएँ,
ये पावन रिश्ता ही विवाह कहलाये।
खुदा करे यूँ ही रहो साथ आप सदा-सदा,
मरकर भी जिससे ये संगम आपका
अमर हो जाए।
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*बहारों से फूल चुराके,
दरिया से ख़ुशी चुराके,
ज़िन्दगी आपकी परिपूर्णता से
महक-महक जाए,
प्यार के जल से बगिया सींचकर,
ये प्यार भरा संगम आपका,
प्रेम-त्याग से खिल-खिल जाए।
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हमारी अदायों पे जाना.....

हमारे आंसूयों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है बहने की,
हमारी हसरतों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है पनपने की।

हमारे हुस्न पे ना जाना,
इसे तो आदत है बोलने की,
हमारी आँखों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है नम होने की।

हमारे मिजाज़ पे ना जाना,
इसे तो आदत है गर्म होने की,
हमारी मुस्कान पे ना जाना,
इसे तो आदत है मदहोश करने की।

हमारी अदायों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है उलझने की,
हमारे एहसास पे ना जाना,
इसे तो आदत है होने की।

हमारे चेहरे पे ना जाना,
इसे तो आदत है मासूमियत की,
हमारी शाईरी पे ना जाना,
इसे तो आदत है बनाने की।
आप बन गए जैसे अभी-अभी.......



अपने......

इमारत में ईंट की तरह,
महल में रौशनी की तरह,
आंसूयों में प्रीत की तरह,
जीवन में अमृत की तरह,
खैव्या की तरह
कश्ती पार जो लगा दें,
बस......
वही अपने कहलायें।

डूबते को तिनके की तरह,
रोते को काँधे की तरह,
सागर को नदी की तरह,
पंछी को अम्बर की तरह,
फ़रिश्ता बनकर जीवन में सूरज जो उगा दें,
बस........
वही अपने कहलायें।

उलझन को सुलझन की तरह,
धुप को छाँव की तरह,
आग को जल की तरह,
विष को अमृत की तरह,
गम अपने छिपाकर,
हमें जो हंसा दें,
बस.......
वही अपने कहलायें।

thank u god 4 giving me
such a lovely angels.....


आशाएं.......


बिन सुरूर के तड़प नही जगती,
बिन तड़प के डगर नही बनती,
राह कितनी ही आसान हो
लेकिन.........
बिन आशा के मंजिल नही मिलती।


बिन आंसू के ख़ुशी नही मिलती,
बिन ख़ुशी के ज़िन्दगी नही बनती,
सुलझने हज़ार मिल जाएँ जीवन में,
लेकिन.....
बिन आशा के ज़िन्दगी नही कटती .

बिन एहसास के प्रीत नही जगती,
बिन प्रीत के ज़िन्दगी नही मिलती,
झोंकें लाख गुज़र जाएँ मजधार से
लेकिन........
बिन आशा के प्रेम-कश्ती पार नही होती।


आशा रौशनी है बिखेरती,
होने से उसके
हर रात है ढलती,
ये है वो चांदनी,
जो सांझ में भी
सवेरा कर देती।