प्रेम आपसे........
हमने सब पा लिया,
आपको जीवन में पाकर,
रस्ता आसान बना लिया,
आपने नीर-क्षीर विवेकी हमको बना दिया।
अब वो पल आ गया.......
आपके रास्तों को आत्मसात कर,
आपसे जुदा होने का वक़्त आ गया,
गुरु दक्षिणा के रूप में,
नाम आपका रोशन करने का अवसर हमको मिल गया।
भीग गयी हैं पलके....
हम हो रहे हैं आपसे जुदा,
फिर भी,
खुदा करे,
हो ना कभी ऐसा,
होना पड़े इन फूलों को जब
अपनी खुशबू से जुदा.
-आपकी शिष्या,
निकिता.
हममें है शक्ति..........
भेद-भाव नहीं किसी से,
हम सब पे कृपा सूरज की होती,
चंदा की चांदनी,
असुरों के भी नसीब में होती।
फूल की खुशबू के आड़े,
काँटों की छाँव आती,
फिर भी कांटे की शख्सियत,
फूल से जुदा नहीं होती।
मछली की गंध,
तालाब से उसको अलग नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
शोभा उसकी घटाने पर भी,
चाँद की चांदनी दाग से जुदा नहीं होती,
लाखों ज़ुल्म सहकर भी,
प्यार की लगी,
उसे महबूब से दूरियां बनाने नहीं देती।
दुःख का साथ होकर भी,
ज़िन्दगी उससे बेवफाई नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?इश्वर का अंश होकर भी,
घमंड की शाला कूट-कूटकर हममें होती,
जीत हांसिल करने के लिए,
ये बुद्धि झूंध की राह पे चल पड़ती।
निर्जीव तो छोड़ो,
हममें होती शक्ति,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
क्या कहें,एक ऐसा भी पल था
हम थे उनके जब करीब...........
आँखों में बहेता सपनो का दरिया,
मन ये सूरज से मिलने के सपने बुनता,
बिना सुरमें के नैनो का श्रृंगार पूर्ण होता।
ऐसा होता,
सादगी में
सूरत का चाँद से ज्यादा चमकना,
दिल में जीत के तूफ़ान का एहसास कराता।
हर दिन,
रात की चांदनी में उनका एहसास होना,
ख्वाब की सेज का उनपर ही पूरा होना,
इसलिए, आँखों से मीठे अश्कों का बह जाना.
क्या कहे,
एक ऐसा भी पल था हम थे उनके जब करीब.................
सुरमई आँखों का उनमे खो जाना,
पल-पल बैचेन होना,
सच्चे प्यार का साक्षात्कार होता।
जानते हैं,
फूल है वो,
जो रोम-रोम मेरा मेहेका देता।
कभी होता,
साथ होगा सदा के लिए,
इसपे हमें अभिमान होना,
अम्बर चूमने के सपने संजोता।
क्या कहें,
एक ऐसा भी पल था हम थे उनके जब करीब..............
आज सब है टूटा-फूटा हुआ,
उनका साथ इन हाथों से फिसलता जा रहा,
एक दर्द,
एक डर,
दिल में आके ठहर गया,
उनको खो देंगे,
एहसास ऐसा हो रहा.
एक-एक क्षण जीवन का कम हो रहा,
सब कुछ होकर भी,
कुछ ना होने का एहसास हो रहा,
जीवन मेरा वीरान होता जा रहा.
एक ये लम्हा बन गया मेरी तकदीर.............
एक ऐसा भी पल था हम थे उनके जब करीब.............