Saturday, July 24, 2010

वो पल......

गुलसिता में बसता वो ज़माना था,
हर लम्हा एक तराना था,
ख्वाहिशों पे थिरकती ज़िन्दगी,
हर लम्हात से मोती चुराना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था....

बागों में डूबता हर उजाला था,
रोने का ना कोई बहाना था,
तारों में बसती ज़िन्दगी,
हर लम्हात ख्वाब सजाता था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...

दिलनशी हर वो अफसाना था,
जो आँखों को लुभाता था,
मिट्टी के बीच डूबती हथेली,
दिल जादूगर का दीवाना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था.....

हर रात में रानी का फ़साना था,
सपनों में परियों का पैमाना था,
चाहत चाँद को छुने की,
तितली का रंग निराला था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...



Tuesday, July 6, 2010

dats life......


पानी है ख़ुशी गर,
तो काँटों पे फिर चलना होगा,
पानी की तरह,
अश्कों को भी पीना होगा

होना है रोशन जहां में गर,
सूरज बन फिर जलना होगा,
शब् की तरह,
तुमको भी ढ़लना होगा

बहेना है सागर में गर,
बंदिशों को झेलना होगा,
आवाज़ बन एक फिर,
बाधायों को तोड़ना होगा

ताज़गी में ढलना है गर,
हवा बन मेहेकना होगा,
रुख बदलकर अपना फिर,
सबको सहलाना होगा
DATS LIFE !!!!!!