रोम-रोम गूँज उठा,
दिल का एक-एक कतरा उत्तेजित हो उठा,
जब एहसास उन्हें हुआ,
मंजिल का उनके करीब होना,

दुश्मनों पे फ़तेह पाकर,
देश का आज़ाद होना.
संकल्प आज लेना होगा,
देश को चोटी पे है पहुंचाना,
राह के कांटे चुनकर,
बुराई पर फ़तेह पाना.
आओ,अपनी आज़ादी को सलाम करें,
हमारे नोनिहालों के आत्मविश्वास को सलाम करें,
बदोलत जिसकी हम और ये समाज आज इस मुकाम
पर है.
जय हिंद.







