Friday, January 14, 2011

कैसे कहें.......


सूनी-सूनी हर शामें हैं हमारी,
दिल से रूठी हर धड़कन है हमारी,
वो छोड़ गया मजधार में मुझे,
वो क्या जाने,
उसके जाने से ख़फ़ा हमसे सांसें है हमारी।

टूटी-टूटी हर सेहर है हमारी,
उसके लिए बेबस जान है हमारी,
कर गया वो रुसवाई हमसे,
वो क्या जाने,
हर पल नई मौत मरी ज़िन्दगी ये हमारी।

अश्कों में डूबी कई रातें हैं हमारी,
रस्ता उसका ही तकती ये शामें हमारी,
उसने की ना कभी मोहोब्बत हमसे,
वो क्या जाने,
किस क़दर चाहती उसे हर धड़कन हमारी।


अब ना बरसेंगी उसकी याद में आँखें हमारी,
ना तडपेगी हर पल रूह ये हमारी,
उसने की बेवफाई हमसे,
वो क्या जाने,
तडपेगा वो भी सच्चे प्यार के लिए
दिल से ये बददुआ है हमारी।

वो क्या जाने,
उसके जाने से ख़फ़ा हमसे हस्ती है हमारी।






खुदा से शिकायत है मुझे,
मेरा खुदा भी शायद उस बेवफा पे कुर्बान है ।


वक़्त के पन्ने तेरे लिए जलाए हैं,
लम्हा ज़िन्दगी का उस मोड़ पर छोड़ आये हैं ,
बाहर निकालो मुझे गुज़रे हुए वक़्त से,/बाहर निकालो उस गुज़रे हुए वक़्त से मुझे,
जिस वक़्त शीशा बनकर टूटा मेरा अरमान है,
खुदा से शिकायत है मुझे,
मेरा खुदा भी शायद उस बेवफा पे कुर्बान है।

भीगी आँखों पर आज भी तेरा इंतज़ार है,
मेरी ज़िन्दगी की हर धड़कन का तू ही तो हक़दार है,
शायद तेरे ही आँचल में सिमटा है ख़ुशी का वो लम्हा,
जिसके लिए आज तक मेरी ज़िन्दगी गुमनाम है,
खुदा से शिकायत है मुझे,
मेरा खुदा भी शायद उस बेवफा पे कुर्बान है।


*ए वक़्त मुझे भी दे कुछ पल ख़ुशी के,
उसके बिना मेरी ज़िन्दगी गुमनाम है।