Sunday, April 11, 2010


दोस्त.

हमारी चाहत का कभी यूँ इम्तिहान ना लेना,

अपनी चाहत में दोस्त

ये दिल ना कभी तोड़ देना


अपनी चाहत का सदा इकरार करना,

हमारी लगाईं में दोस्त,

ज़िन्दगी अपनी ना बर्बाद कर लेना


यूँ रुसवाई में बेवफाई ना करना,

किसी के आवेश में आकर दोस्त,

ये साथ ना छोड़ देना


आपकी सदायें,

ये अदाएं इश्वर की अमानत हैं,

यूँ ही झल्काकर इन्हें दोस्त,

इश्वर से बेवफाई ना करना



तन्हाइयों में आंसू झलकाया ना करना,

पलके अपनी उठाके दोस्त,

आँखें कभी नम ना कर लेना



हमारी चाहत का कभी यूँ इम्तिहान ना लेना,

अपनी चाहत में दोस्त

ये दिल ना कभी तोड़ देना


love u a lot mere dost..........

-yours n only yours

nikita.








Tuesday, April 6, 2010

किस्मत.


सर पर ममता का आँचल,

अंगूली पकडे पिता का साथ,

किस्मत की इतनी धनि हूँ मैं,

जो क़ुबूल होती मेरी हर मुराद


आते हैं तूफ़ान,

लेकिन....लम्बा सफ़र तय करने नहीं,

भटकते हैं कदम,

पर.....दूर चलने के लिए नहीं

किस्मत में हो जिसकी

बेगानों का भी साथ,

हांसिल मैंने किया है वो मुकाम


सवार हूँ ऐसी कश्ती में मैं,

खवैया जिसका है भगवान्,

कदम बहेक जाएँ,

ऐसा होता नहीं,

है इश्वर के हाथों में

मेरा हाथ


सपने जो संजोये थे,

कभी जिनके लिए हम रोये थे,

आज हो गए वो साकार,

किस्मत का ऐसा मुकाम,

इश्वर नें किया मेरे नाम








मैं.......


बुझ जाए आंधी से,

जलता रहे प्यार के आँचल में,

आज वो दीप हूँ मैं

खुशबु जुदा होने पर

मुरझा जो जाए,

अपनों की बगिया में खिला वो फूल हूँ मैं


निरंतर बदती जाए सागर की ओर,

आज वो नदी हूँ मैं,

बादलों को अपनी ओट में छिपाए,

धूप, कभी छाँव का साधन बना,

ऐसा एक अम्बर हूँ मैं


सोने-चांदी से जड़ा,

गगन को चूमता,

महेल--ताज हूँ मैं,

बेनाम नफरत,

खोफ्नाक आग का प्रतीक,

जला एक आशियाँ हूँ मैं


वंश को रोशन करने वाला,

उगता सूरज हूँ मैं,

काली घटायों के आवेश में आकर,

घरौंदा जलाने वाला,

आग का गोला भी हूँ मैं

ऐसा हूँ मैं.......





एक सफ़र, मेरी चाह......



चलता चला मैं डगर-डगर,

रास्तों को बना लिया सफ़र,

आगे देखा तो हसीं शाम थी,

पीछे देखा मेरी चाह थी,

चाह को पाने की लत में

बढाता चला गया कदम


चलता चला में डगर-डगर,

राहें जटिल होती गयीं मगर,

साथ मेरे थी चाह, मेरी सनक,

राहें बन गयीं मेरी सरल,

मंजिल दूर थी मगर,

चलता चला मैं अपनी डगर


था गम व् ख़ुशी का सबब,

हार तो कभी जीत मिली

मुझे हर पल,

कदम-कदम अपना बढाकर,

हांसिल हुई जीत हमको कदम-कदम

आखिरकार.......

बादलों की ओट से बाहर आकर

सूरज मुस्कुरानी लगा हम पर,

कहेने लगा.......

झूंठी नहीं तेरी चाहत,

करके प्रयत्न हर दम,

हांसिल कर लिया तूने विजयपथ,

हो गया पूर्ण तेरा सफ़र

dosti aapse......

दोस्ती आपसे जब हो गयी,

हमारे जीवन की दिशा ही बदल गयी,

कभी फूल कम,

कांटे उगा करते थे हमारी बगिया में,

आने से आपके

हमारे आँगन में खुशियों की फुलवाड़ी लग गयी


कभी जताया हक़,

तो बरसाया कभी प्यार,

फिर सोचा...भूल हमसे हो गयी,

हक़ उनपर जताकर

अनजानी खता हमसे हो गयी


हम तो चले थे बूँद ढूँढने,

प्यार और वफ़ा की बारिश हमारे नाम हो गयी,

दोस्ती के रूप में आपकी,

सपनो से भरी कश्ती हमारे नाम हो गयी


दोस्ती का हमारी है रंग अलग,

मिला है इसमें रंगों का संगम,

भावनायों में बहकर भी

इसलिए सताते आपको हम नहीं,

हो ना जो आपको मंज़ूर,

ऐसा हम कुछ करते नहीं


अम्बर देखा तो दिखे इश्वर ही,

धरा पर खोजा तो मिली आपकी छवि,

डांटना, फटकारना, कहेना चाहे कुछ भी,

पर गलती से भी कहेना नहीं कभी,

thankyou n sorry.