
रातों को वीरानियाँ कब तक गुन्गुनाएँगी,
तेरे दिल की ये मन्ज़ीरें कब तक झंझ्नायेंगी,
इश्क के गलियारों में तेरी आँखें
भला कब तक आंसू बहायेंगी।
ज़फाओं के काँटों पर कब तक तेरी हसरतें मुरझाएँगी,
रैना ढले कब तक ये ज़िन्दगी जलती जायेगी,
ज़फायों के समुन्दर में तेरी हस्ती
भला कब तक गोते लगाएगी।
आहों की चादर ओड़े कब तक यादें झुन्झ्लायेंगीं,
नासूर बन कब तक बेताबी सताएगी,
ज़ख्म के आख्रोश में तेरी धडकनें
भला कब तक सांसें गंवाएंगीं।
बेवफाई की मौज़ें कब तक मुस्कुरायेंगी,
दर्द से कराहती तेरी धडकनें कब तक टूट पाएंगी,
वफ़ा के गुलदानों में तेरी मोहोब्बत
एक दिन ज़रूर महक जायेगी।
तेरे दिल की ये मन्ज़ीरें कब तक झंझ्नायेंगी,
इश्क के गलियारों में तेरी आँखें
भला कब तक आंसू बहायेंगी।
ज़फाओं के काँटों पर कब तक तेरी हसरतें मुरझाएँगी,
रैना ढले कब तक ये ज़िन्दगी जलती जायेगी,
ज़फायों के समुन्दर में तेरी हस्ती
भला कब तक गोते लगाएगी।
आहों की चादर ओड़े कब तक यादें झुन्झ्लायेंगीं,
नासूर बन कब तक बेताबी सताएगी,
ज़ख्म के आख्रोश में तेरी धडकनें
भला कब तक सांसें गंवाएंगीं।
बेवफाई की मौज़ें कब तक मुस्कुरायेंगी,
दर्द से कराहती तेरी धडकनें कब तक टूट पाएंगी,
वफ़ा के गुलदानों में तेरी मोहोब्बत
एक दिन ज़रूर महक जायेगी।
