Wednesday, October 13, 2010

कब तक.......


रातों को वीरानियाँ कब तक गुन्गुनाएँगी,
तेरे दिल की ये मन्ज़ीरें कब तक
झंझ्नायेंगी,
इश्क के गलियारों में तेरी आँखें
भला कब तक आंसू बहायेंगी।

ज़फाओं के काँटों पर कब तक तेरी हसरतें मुरझाएँगी,
रैना ढले कब तक ये ज़िन्दगी जलती जायेगी,
ज़फायों के समुन्दर में तेरी हस्ती
भला कब तक गोते लगाएगी।

आहों की चादर ओड़े कब तक यादें झुन्झ्लायेंगीं,
नासूर बन कब तक बेताबी सताएगी,
ज़ख्म के आख्रोश में तेरी धडकनें
भला कब तक सांसें गंवाएंगीं।

बेवफाई की मौज़ें कब तक मुस्कुरायेंगी,
दर्द से कराहती तेरी धडकनें कब तक टूट पाएंगी,
वफ़ा के गुलदानों में तेरी मोहोब्बत
एक दिन ज़रूर महक जायेगी।



Thursday, October 7, 2010

आँखों का सागर उनसे छुपा लिया,
इस दिल में मचलता तूफ़ान मना लिया,
उनकी खुशियों के लिए हमने,
इस चेहरे से आवाज़ को मिटा दिया।

दर्द के हर अक्स को सीने में छुपा लिया,
इन लबों से शब्दों को चुरा लिया,
उनकी दुआयों के लिए हमने,
होठों पे मुस्कान को सजा लिया।

हर बहेते सागर को उन्होंने पहचान लिया,
उसे हमारी आँखों से चुरा लिया,
एक मुस्कान के लिए हमारी,
उन्होंने अपनी हर सांस को गँवा दिया।



immotions

जब किसी से हालात खफा हो जाते हैं,
ये जज़्बात उसके लिए
जब दिल से जुदा हो जाते हैं,
तब ए दोस्त,
मौला उनका सहारा बन जाते हैं!!!!!!!!!


आंसू बहाना हमने छोड़ दिया
दुखों का दम घोटकर खुशियों से नाता जोड़ लिया...
बेटा अब परेशां करो
मैं बताती हूँ तुम्हे!!!!!!!!!