Tuesday, February 2, 2010

क्या कहें,एक ऐसा भी पल था
हम थे उनके जब करीब...........

आँखों में बहेता सपनो का दरिया,

मन ये सूरज से मिलने के सपने बुनता,

बिना सुरमें के नैनो का श्रृंगार पूर्ण होता।
ऐसा होता,

सादगी में

सूरत का चाँद से ज्यादा चमकना,

दिल में जीत के तूफ़ान का एहसास कराता।

हर दिन,

रात की चांदनी में उनका एहसास होना,

ख्वाब की सेज का उनपर ही पूरा होना,

इसलिए, आँखों से मीठे अश्कों का बह जाना.

क्या कहे,

एक ऐसा भी पल था हम थे उनके जब करीब.................


सुरमई आँखों का उनमे खो जाना,


पल-पल बैचेन होना,


सच्चे प्यार का साक्षात्कार होता।

जानते हैं,

फूल है वो,

जो रोम-रोम मेरा मेहेका देता।

कभी होता,

साथ होगा सदा के लिए,


इसपे हमें अभिमान होना,


अम्बर चूमने के सपने संजोता।

क्या कहें,


एक ऐसा
भी पल था हम थे उनके जब करीब..............


आज सब है टूटा-फूटा हुआ,


उनका साथ इन हाथों से फिसलता जा रहा,


एक दर्द,


एक डर,


दिल में आके ठहर गया,


उनको खो देंगे,


एहसास ऐसा हो रहा.


एक-एक क्षण जीवन का कम हो रहा,


सब कुछ होकर भी,


कुछ ना होने का एहसास हो रहा,

जीवन मेरा वीरान होता जा रहा.


एक ये लम्हा बन गया मेरी तकदीर.............
एक ऐसा भी पल था हम थे उनके जब करीब.............




























No comments:

Post a Comment