हममें है शक्ति..........
भेद-भाव नहीं किसी से,
हम सब पे कृपा सूरज की होती,
चंदा की चांदनी,
असुरों के भी नसीब में होती।
फूल की खुशबू के आड़े,
काँटों की छाँव आती,
फिर भी कांटे की शख्सियत,
फूल से जुदा नहीं होती।
मछली की गंध,
तालाब से उसको अलग नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
शोभा उसकी घटाने पर भी,
चाँद की चांदनी दाग से जुदा नहीं होती,
लाखों ज़ुल्म सहकर भी,
प्यार की लगी,
उसे महबूब से दूरियां बनाने नहीं देती।
दुःख का साथ होकर भी,
ज़िन्दगी उससे बेवफाई नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
इश्वर का अंश होकर भी,
घमंड की शाला कूट-कूटकर हममें होती,
जीत हांसिल करने के लिए,
ये बुद्धि झूंध की राह पे चल पड़ती।
निर्जीव तो छोड़ो,
हममें होती शक्ति,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
भेद-भाव नहीं किसी से,
हम सब पे कृपा सूरज की होती,
चंदा की चांदनी,
असुरों के भी नसीब में होती।
फूल की खुशबू के आड़े,
काँटों की छाँव आती,फिर भी कांटे की शख्सियत,
फूल से जुदा नहीं होती।
मछली की गंध,
तालाब से उसको अलग नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
शोभा उसकी घटाने पर भी,
चाँद की चांदनी दाग से जुदा नहीं होती,
लाखों ज़ुल्म सहकर भी,
प्यार की लगी,
उसे महबूब से दूरियां बनाने नहीं देती।
दुःख का साथ होकर भी,
ज़िन्दगी उससे बेवफाई नहीं करती,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?
इश्वर का अंश होकर भी,
घमंड की शाला कूट-कूटकर हममें होती,
जीत हांसिल करने के लिए,
ये बुद्धि झूंध की राह पे चल पड़ती।
निर्जीव तो छोड़ो,
हममें होती शक्ति,
फिर हमारी इंसानियत,
दुश्मनों का साथ क्यूँ नहीं देती?

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