प्रेम आपसे........
हमने सब पा लिया,
आपको जीवन में पाकर,
रस्ता आसान बना लिया,
आपने नीर-क्षीर विवेकी हमको बना दिया।अब वो पल आ गया.......
आपके रास्तों को आत्मसात कर,
आपसे जुदा होने का वक़्त आ गया,
गुरु दक्षिणा के रूप में,
नाम आपका रोशन करने का अवसर हमको मिल गया।
भीग गयी हैं पलके....
हम हो रहे हैं आपसे जुदा,
फिर भी,
खुदा करे,
हो ना कभी ऐसा,
होना पड़े इन फूलों को जब
अपनी खुशबू से जुदा.
-आपकी शिष्या,
निकिता.

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