हमारे आंसूयों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है बहने की,
हमारी हसरतों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है पनपने की।
हमारे हुस्न पे ना जाना,
इसे तो आदत है बोलने की,
हमारी आँखों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है नम होने की।
हमारे मिजाज़ पे ना जाना,
इसे तो आदत है गर्म होने की,
हमारी मुस्कान पे ना जाना,
इसे तो आदत है मदहोश करने की।
हमारी अदायों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है उलझने की,
हमारे एहसास पे ना जाना,
इसे तो आदत है होने की।
हमारे चेहरे पे ना जाना,
इसे तो आदत है मासूमियत की,
हमारी शाईरी पे ना जाना,
इसे तो आदत है बनाने की।
आप बन गए जैसे अभी-अभी.......
इन्हें तो आदत है बहने की,
हमारी हसरतों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है पनपने की।
हमारे हुस्न पे ना जाना,
इसे तो आदत है बोलने की,
हमारी आँखों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है नम होने की।
हमारे मिजाज़ पे ना जाना,
इसे तो आदत है गर्म होने की,
हमारी मुस्कान पे ना जाना,
इसे तो आदत है मदहोश करने की।
हमारी अदायों पे ना जाना,
इन्हें तो आदत है उलझने की,
हमारे एहसास पे ना जाना,
इसे तो आदत है होने की।
हमारे चेहरे पे ना जाना,
इसे तो आदत है मासूमियत की,
हमारी शाईरी पे ना जाना,
इसे तो आदत है बनाने की।
आप बन गए जैसे अभी-अभी.......

Bakwas poem thi :x
ReplyDeleteMere comment pe na jana,
inhe toh aadat hai jhoot bolne ki! :P
HA HA :D
Badhiya hai... I really liked it.. :D
one of my favourites... :)
HMM.....
ReplyDeleteTHANX BHAIYA.