Monday, May 31, 2010

अपने......

इमारत में ईंट की तरह,
महल में रौशनी की तरह,
आंसूयों में प्रीत की तरह,
जीवन में अमृत की तरह,
खैव्या की तरह
कश्ती पार जो लगा दें,
बस......
वही अपने कहलायें।

डूबते को तिनके की तरह,
रोते को काँधे की तरह,
सागर को नदी की तरह,
पंछी को अम्बर की तरह,
फ़रिश्ता बनकर जीवन में सूरज जो उगा दें,
बस........
वही अपने कहलायें।

उलझन को सुलझन की तरह,
धुप को छाँव की तरह,
आग को जल की तरह,
विष को अमृत की तरह,
गम अपने छिपाकर,
हमें जो हंसा दें,
बस.......
वही अपने कहलायें।

thank u god 4 giving me
such a lovely angels.....


5 comments:

  1. very nice niks ,,,,very well written ...liked the lovely style of ur poetry ,,,so nice n cute,,,,,

    ReplyDelete
  2. Apne liye to sb jite h na jane zindgi hmari kis k kam aayegi, khusiya degi ya viran zindgi oro ki kr jayegi, kya pta kise sans kb ruk jayegi

    ReplyDelete