गुलसिता में बसता वो ज़माना था,
हर लम्हा एक तराना था,
ख्वाहिशों पे थिरकती ज़िन्दगी,
हर लम्हात से मोती चुराना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था....
बागों में डूबता हर उजाला था,
रोने का ना कोई बहाना था,
तारों में बसती ज़िन्दगी,
हर लम्हात ख्वाब सजाता था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...
दिलनशी हर वो अफसाना था,
जो आँखों को लुभाता था,
मिट्टी के बीच डूबती हथेली,
दिल जादूगर का दीवाना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था.....
हर रात में रानी का फ़साना था,
सपनों में परियों का पैमाना था,
चाहत चाँद को छुने की,
तितली का रंग निराला था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...
हर लम्हा एक तराना था,
ख्वाहिशों पे थिरकती ज़िन्दगी,
हर लम्हात से मोती चुराना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था....
बागों में डूबता हर उजाला था,
रोने का ना कोई बहाना था,
तारों में बसती ज़िन्दगी,
हर लम्हात ख्वाब सजाता था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...
दिलनशी हर वो अफसाना था,
जो आँखों को लुभाता था,
मिट्टी के बीच डूबती हथेली,
दिल जादूगर का दीवाना था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था.....
हर रात में रानी का फ़साना था,
सपनों में परियों का पैमाना था,
चाहत चाँद को छुने की,
तितली का रंग निराला था,
वो हर पल हमपे मुस्कुराता था...

Tum hi murjha gye to khushbu ka kya hoga, khilne se phle chman tbhah hoga, mat smjhna khud ko akele jahan se, bhanhe felakr to dekho jahan tumhari bhanho me hoga
ReplyDeletearey!! Mera comment kahan gaya??? :(
ReplyDeleteYeh badi hi acchi kavita hai Nikki.. bas thodi negativity jyada hai! :(
Phir ayegi woh fizayein,
phir hoga vadiyon ka woh dera,
phir milenge woh dost saare,
hoga phir se savera.
thanx bhaiya.
ReplyDeletemjhe maloom hai ek din zarur aayega jb hm honge kamyaab!!!!!!