मैं एक पंछी पिंजरे में बैठा हूँ,
यहाँ से आज़ाद होने का रस्ता ढूंढ रहा हूँ।
इन खुले मैदानों में,
नदियों में आकाशों में,
पंख फैलाए उड़ना चाहता हूँ,
अपना अस्तित्व खोजना चाहता हूँ।
एक ऐसा दरिया जहां मैं और मेरे अपने होंगें,
खुशियों का समंदर खोज रहा हूँ,
पिंजरे में बैठा कबसे मैं फडफडा रहा हूँ।
जीना चाहता हूँ एक नयी ज़िन्दगी,
मुसीबत से जूझना चाहता हूँ,
अपने दर आई निगाहों से,
निगाहें मैं मिलाना चाहता हूँ।
दर-दर भटकूँ, चाहे अपनाया जायुं राहों के द्वारा,
ज़िन्दगी को अपनी एक मौका मैं देना चाहता हूँ,
पिंजरा तोड़ बन्धनों का आगे मैं बड़ना चाहता हूँ।
दिए की लो बनकर जलना मैं चाहता हूँ,
ज़िन्दगी के हसीं सफ़र में
कुछ लम्हे खुद के लिए चुराना चाहता हूँ,
कबसे बेचैन हो रहा मैं,'
अब तो आज़ाद होना चाहता हूँ।
एक कदम अपना बढाकर,
राहगीरों का हमसफ़र बनना चाहता हूँ,
हर ख़ुशी,
हर चुनौती का
लुफ्त मैं उठाना चाहता हूँ।
बचपन की देहलीज लांघकर,
युवा मैं बनना चाहता हूँ,
कैद हूँ एक पिंजरे में मैं ,
अब तो बस उड़ना चाहता हूँ।
यहाँ से आज़ाद होने का रस्ता ढूंढ रहा हूँ।
इन खुले मैदानों में,
नदियों में आकाशों में,पंख फैलाए उड़ना चाहता हूँ,
अपना अस्तित्व खोजना चाहता हूँ।
एक ऐसा दरिया जहां मैं और मेरे अपने होंगें,
खुशियों का समंदर खोज रहा हूँ,
पिंजरे में बैठा कबसे मैं फडफडा रहा हूँ।
जीना चाहता हूँ एक नयी ज़िन्दगी,
मुसीबत से जूझना चाहता हूँ,
अपने दर आई निगाहों से,
निगाहें मैं मिलाना चाहता हूँ।
दर-दर भटकूँ, चाहे अपनाया जायुं राहों के द्वारा,
ज़िन्दगी को अपनी एक मौका मैं देना चाहता हूँ,
पिंजरा तोड़ बन्धनों का आगे मैं बड़ना चाहता हूँ।
दिए की लो बनकर जलना मैं चाहता हूँ,
ज़िन्दगी के हसीं सफ़र में
कुछ लम्हे खुद के लिए चुराना चाहता हूँ,
कबसे बेचैन हो रहा मैं,'
अब तो आज़ाद होना चाहता हूँ।
एक कदम अपना बढाकर,
राहगीरों का हमसफ़र बनना चाहता हूँ,
हर ख़ुशी,
हर चुनौती का
लुफ्त मैं उठाना चाहता हूँ।
बचपन की देहलीज लांघकर,
युवा मैं बनना चाहता हूँ,
कैद हूँ एक पिंजरे में मैं ,
अब तो बस उड़ना चाहता हूँ।

'Main panchi ab udna chahta hoon' excellently put...!
ReplyDeleteBahut hi badhiya.. for me this is your best till now.
thanxxxxx a lot bhaiya...
ReplyDelete